कोरियन स्ट्रीट फूड बुनसिक: तोक्बोक्की, सुन्दे, ओदेंग और त्विगिम
तोक्बोक्की सॉस के प्रकार, चावल और गेहूँ के तोक में फ़र्क़, स्नैक दुकान बनाम स्पेशलिटी रेस्टोरेंट का सुन्दे, ओदेंग का साफ़ शोरबा और त्विगिम खाने का तरीका
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कोरिया में किसी बुनसिक दुकान में जाएँ, तो तोक्बोक्की, सुन्दे, ओदेंग और त्विगिम को एक साथ खाने का कॉम्बिनेशन बहुत आम दिखता है। एक ही ट्रे में ये चारों चीज़ें साथ-साथ रखी हों, यह नज़ारा हर कोरियाई के लिए जाना-पहचाना है :)
बुनसिक (粉食) शब्द का मूल अर्थ है "आटे से बना खाना"। कहा जाता है कि कोरियाई युद्ध के बाद, जब चावल की कमी थी, सरकार ने गेहूँ के आटे से बने खाने को बढ़ावा दिया और तभी यह खूब फैला। आजकल यह शब्द ऐसे सभी कोरियाई खानों के लिए इस्तेमाल होता है जो स्नैक जैसे होते हैं और जिनकी कीमत भी अपेक्षाकृत जेब पर भारी नहीं पड़ती।
बहुत पहले मैं एक बार अकेले एक बुनसिक दुकान में गई थी और भूख लगी थी, तो ये चारों चीज़ें खा ली थीं। कोई ख़ास प्लान नहीं था, बस भूख मिटाने के लिए अकेले बैठकर खाना खाया था।
इसलिए यह लेख उस दुकान का रिव्यू नहीं है! यह उन विदेशी दोस्तों के लिए है जो पहली बार कोरियाई बुनसिक से मिल रहे हैं, ताकि उन्हें पता चले कि इनमें से हर डिश आख़िर है क्या।
तोक्बोक्की, सुन्दे, ओदेंग और त्विगिम: बुनसिक सेट एक नज़र में
आज जिस सेट की बात करूँगी, वह कोरिया की बुनसिक दुकानों में आम तौर पर दिख जाता है।
देश की लगभग किसी भी बुनसिक दुकान में ऐसा ही मिलता-जुलता सेट मिल जाता है, इसलिए मैं किसी ख़ास दुकान का नाम नहीं ले रही, सिर्फ़ खाने के बारे में बात करूँगी।
फ़ोटो में लाल ट्रे पर चार चीज़ें रखी हैं। ऊपर बाईं ओर की प्लेट में सुन्दे है। यह एक कोरियाई सॉसेज है, जिसमें सूअर की आँत के अंदर ग्लास नूडल्स (दांगम्योन), चिपचिपे चावल और सब्ज़ियाँ वग़ैरह भरकर भाप में पकाया जाता है। यह एक-एक कौर के आकार में कटकर आया था। प्लेट के दाईं ओर कटे हुए अंदरूनी अंग (ऑफ़ल) भी रखे थे। सुन्दे के साथ आम तौर पर कलेजी या फेफड़ा परोसा जाता है, और इसे नमक या मसालेदार नमक में डुबोकर खाने का तरीका काफ़ी मशहूर है।
ऊपर दाईं ओर की टोकरी में त्विगिम है। त्विगिम उन सभी चीज़ों को कहते हैं जिन पर गेहूँ के आटे का घोल चढ़ाकर तेल में तला जाता है।
नीचे बाईं ओर के कटोरे में ओदेंग है। यह मछली के गूदे से बना फिश केक (ओमुक) है, जिसे गरम शोरबे में डुबोकर परोसा जाता है। फिश केक को आम तौर पर मूली और हरे प्याज़ के साथ उबाला जाता है। कोरिया में इस डिश को ओदेंग भी कहते हैं और ओमुक भी।
नीचे दाईं ओर के कटोरे में तोक्बोक्की है। इसमें गारेतोक, यानी लंबी डंडी जैसे चावल के केक को लंबे टुकड़ों में काटकर मीठी और तीखी गोचुजांग (कोरियाई लाल मिर्च का पेस्ट) सॉस में पकाया जाता है।
तोक्बोक्की: गोचुजांग सॉस से लेकर तरह-तरह के स्वाद तक
तोक्बोक्की को पास से देखें तो चावल के केक मोटे, बेलनाकार टुकड़े हैं और सॉस चिकनी व चमकदार है। ऊपर तिल और बारीक कटा हरा प्याज़ छिड़का हुआ है। बीच में आधे चाँद के आकार का एक कुरकुरा-सा दिखने वाला त्विगिम का टुकड़ा रखा है, और उसके पास कोई सफ़ेद, गोल चीज़ भी दिख रही है।
तोक्बोक्की सिर्फ़ एक ही स्वाद में नहीं आती! गोचुजांग से बनी यह मीठी-तीखी सॉस वाली तोक्बोक्की सबसे मशहूर ज़रूर है, लेकिन जोसॉन राजवंश के शाही दरबार में खाई जाने वाली, सोया सॉस वाली हल्की तोक्बोक्की भी होती है। अगर आपको ज़्यादा तीखा खाना भारी लगता है, तो इसे ढूँढ़कर देख सकते हैं। दुकान के हिसाब से इसमें फिश केक, उबला अंडा या रामयॉन नूडल्स भी डाले जाते हैं, और चीज़ या कार्बोनारा सॉस जैसे नए स्वादों वाली तोक्बोक्की भी मिलती है। नाम एक ही होने पर भी हर दुकान में इसका रूप काफ़ी अलग होता है।
चावल वाली और गेहूँ वाली तोक्बोक्की में क्या फ़र्क़ है?
| पहलू | चावल वाली तोक्बोक्की (स्सालतोक) | गेहूँ वाली तोक्बोक्की (मिलतोक) |
|---|---|---|
| मुख्य सामग्री | चावल या चावल का आटा | गेहूँ का आटा |
| बनावट | माना जाता है कि यह घनी और रबड़ जैसी लचीली होती है। | कई उत्पादों को उछलती-सी, लचीली और चबाने लायक बताया जाता है। |
| सॉस के साथ तालमेल | कहा जाता है कि इसमें सॉस धीरे-धीरे समाती है। | उत्पाद और पकाने के तरीके के हिसाब से काफ़ी फ़र्क़ होता है। |
| एलर्जी और ग्लूटेन | सिर्फ़ चावल से बनी हो तो ग्लूटेन नहीं होता, लेकिन कुछ उत्पादों में गेहूँ का आटा भी मिला होता है, इसलिए सामग्री की सूची ज़रूर जाँचें। | गेहूँ का आटा होने की वजह से इसमें ग्लूटेन होता है। |
| कच्चे माल की कीमत | कच्चे माल के तौर पर चावल का आटा आम तौर पर गेहूँ के आटे से महँगा पड़ता है। | गेहूँ का आटा अपेक्षाकृत सस्ता है, इसलिए चावल के तोक की जगह यह बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने लगा। |
बनावट इस बात पर निर्भर करती है कि इसे कहाँ बनाया गया, कौन-सा उत्पाद है और कितनी देर उबाला गया, और लोगों की पसंद भी अलग-अलग होती है। ऊपर लिखी बातें सिर्फ़ आम तौर पर मानी जाने वाली प्रवृत्तियाँ हैं, यह तय नहीं है कि कौन-सी बेहतर है।
तोक्बोक्की की सॉस, कितनी तरह की!
| प्रकार | ख़ासियत |
|---|---|
| गोचुजांग तोक्बोक्की (ओरिजिनल) | गोचुजांग पर आधारित मीठी-तीखी सॉस। बुनसिक दुकानों में सबसे ज़्यादा मिलने वाला बुनियादी स्वाद। |
| गुंगजुंग तोक्बोक्की (शाही तोक्बोक्की) | सोया सॉस से बनी, बिना तीखेपन वाली तोक्बोक्की। माना जाता है कि यह जोसॉन राजवंश के शाही दरबार में खाने के तरीके से चली आ रही है, इसलिए जिन्हें तीखा भारी लगता है, उनके लिए अच्छी रहती है। |
| जाजांग तोक्बोक्की | जाजांग सॉस में पकाई गई तोक्बोक्की। लाल गोचुजांग तोक्बोक्की के उलट इसका रंग गहरा होता है और इसमें तीखापन मुख्य नहीं होता। |
| माला तोक्बोक्की | माला मसालों से झनझनाहट वाला तीखा स्वाद दी गई तोक्बोक्की। |
| क्रीम और रोज़े तोक्बोक्की | दूध या क्रीम मिलाकर नरम बनाई गई तोक्बोक्की। तीखापन कम होने की वजह से हल्का स्वाद पसंद करने वाले बहुत से लोग इसे चुनते हैं। |
| कार्बोनारा, चीज़ और दूसरे बदलाव | कार्बोनारा सॉस वाली, ऊपर चीज़ डाली हुई या रामयॉन नूडल्स डालकर बनी राबोक्की — हर दुकान के अपने-अपने बदलाव होते हैं। |
मेन्यू के नाम और स्वाद दुकान-दर-दुकान थोड़े अलग हो सकते हैं।
सुन्दे: बुनसिक दुकान का चिपचिपे चावल वाला सुन्दे बनाम स्पेशलिटी रेस्टोरेंट का सुन्दे
बुनसिक दुकानों में सुन्दे भी तोक्बोक्की जितना ही आम मिलता है। इस प्लेट में सुन्दे एक-एक कौर के टुकड़ों में कटा है और कटे हिस्से में अंदर की भराई ठसाठस भरी दिखती है। बीच-बीच में हरे प्याज़ जैसे हरे टुकड़े भी नज़र आते हैं।
सच कहूँ तो मुझे बुनसिक दुकान का सुन्दे आकार और भराई दोनों में इतना एक जैसा लगता है कि जैसे फ़ैक्टरी में बनकर आया हो। सुन्दे के स्पेशलिटी रेस्टोरेंट में मिलने वाले सुन्दे से इसका मिज़ाज थोड़ा अलग है। फिर भी यह सिर्फ़ मेरा अपना खाकर बना अनुभव है, यह नहीं कह सकती कि हर बुनसिक दुकान में ऐसा ही होता है।
स्पेशलिटी रेस्टोरेंट में जाएँ तो विकल्प कहीं ज़्यादा हो जाते हैं। चुंगछ'ओंग इलाक़े का ब्यॉंगछ'ॉन सुन्दे सब्ज़ियों और जमे हुए ख़ून (सॉनजी) की ज़्यादा मात्रा की वजह से हल्के स्वाद वाला होता है, जबकि हामग्यॉंग और प्यॉंगआन इलाक़े की परंपरा वाला अबाई सुन्दे मोटा और पेट भरने वाला होता है। ग्यॉंगगी प्रांत के योंगइन का बेगाम सुन्दे, जॉल्ला इलाक़े का पी-सुन्दे और जेजू का सुन्दे भी मशहूर किस्में हैं।
विदेशियों को सुन्दे अनजाना-सा लग सकता है। फिर भी बुनसिक दुकानों में मिलने वाला चिपचिपे चावल वाला सुन्दे इनमें सबसे आसानी से अपनाया जा सकने वाला है, और स्वादिष्ट भी है! साथ में आने वाले अंदरूनी अंग अगर आपको ठीक न लगें, तो उन्हें न खाएँ, कोई बात नहीं। ऑर्डर करते समय "सुन्दे-मान जुसेयो" ("सिर्फ़ सुन्दे दीजिए") कहेंगे, तो वे सिर्फ़ सुन्दे ही परोसेंगे।
ओदेंग (ओमुक): कटोरे में भी, सड़क किनारे सीख पर भी
कुछ जगहों पर ओदेंग को इसी तरह कटोरे में शोरबे के साथ परोसा जाता है। फ़ोटो में चौकोर कटे और गोल-गोल लिपटे फिश केक साफ़ शोरबे में डूबे हैं, साथ में बारीक कटा हरा प्याज़ और सूखे समुद्री शैवाल (गिम) के टुकड़े भी दिख रहे हैं।
सड़क किनारे के ठेलों पर तरीका थोड़ा अलग होता है। वहाँ सीख में लगा फिश केक पेपर कप में गरम शोरबे के साथ मिलता है, और ज़्यादातर इसे सोया सॉस में डुबोकर खाया जाता है। खड़े-खड़े झटपट खाया जा सकता है, इसलिए आते-जाते थोड़ी देर रुककर खाने के लिए यह एकदम सही स्नैक है।
गर्मियों का तो पता नहीं, लेकिन आने वाली सर्दियों में ओदेंग सच में सबसे बढ़िया है! ठंडी सड़क पर गरमागरम शोरबे का एक घूँट लेते ही लगता है जैसे पूरे शरीर की अकड़न धीरे-धीरे खुल रही हो।
ओदेंग का शोरबा, दो तरह का
| प्रकार | ख़ासियत |
|---|---|
| साफ़ ओदेंग शोरबा (बुनियादी) | बुनसिक दुकानों और ठेलों पर आम तौर पर मिलने वाला शोरबा। इसका रंग साफ़ होता है और इसे गरम-गरम पिया जा सकता है। बहुत से लोग फिश केक खाने के बाद शोरबा भी पी जाते हैं। |
| तीखा ओदेंग शोरबा (कुछ ठेलों पर) | कुछ ठेले अलग से तीखा शोरबा भी बेचते हैं। जब साफ़ शोरबे से ज़्यादा चटपटा, तीखा स्वाद चाहिए हो, तब यह अच्छा रहता है। |
शोरबे का स्वाद और तीखापन दुकान-दर-दुकान अलग हो सकता है।
त्विगिम: सेट में खाएँ या एक-एक करके चुनें
काग़ज़ बिछी टोकरी में त्विगिम रखा है। इसमें कई तरह की चीज़ें मिली-जुली हैं: समुद्री शैवाल में लपेटकर तली हुई चीज़, डम्पलिंग के बाहरी आवरण जैसी दिखने वाली चीज़, अंदर से सफ़ेद दिखने वाली चीज़ और सुनहरे तले हुए चपटे टुकड़े तक। जहाँ मैं गई थी, वहाँ त्विगिम इसी तरह सेट में दिया गया था।
वैसे त्विगिम ज़्यादातर दुकानों में एक-एक करके चुनकर अलग से बिकता है। पहले यह सस्ता होता था, लेकिन महँगाई बहुत बढ़ जाने से अब इसे सस्ता कहना थोड़ा मुश्किल है :(
खाने का तरीका हर किसी का अपना होता है। मैं तो बस सोया सॉस में हल्का-सा डुबोकर खाती हूँ। कुछ लोग इसे तोक्बोक्की की सॉस में अच्छी तरह डुबोकर खाते हैं, यह पूरी तरह अपनी-अपनी पसंद की बात है!
आख़िर में: कोरिया आएँगे, तो बुनसिक से मुलाक़ात ज़रूर होगी
अगर आप कोरिया आते हैं, तो मेरे हिसाब से 90% से ज़्यादा यात्री बुनसिक ज़रूर खाएँगे। इसके लिए किसी शानदार रेस्टोरेंट की ज़रूरत नहीं — तोक्बोक्की, सुन्दे, ओदेंग और त्विगिम एक ही टेबल पर आने वाला आम खाना है, और सड़क पर चलते-चलते यह कहीं भी मिल जाता है।
स्वाद और कीमत हर दुकान में थोड़े अलग होते हैं, और अब यह पहले जितना सस्ता नहीं रहा। अगर तीखा खाना भारी लगता है तो ओदेंग के शोरबे से शुरुआत करें, और अगर सुन्दे के साथ आने वाले अंदरूनी अंग ठीक न लगें तो सिर्फ़ सुन्दे ऑर्डर कर लें। और अगर आप आने वाली ठंडी सर्दियों में आ रहे हैं, तो मेरी सलाह है कि सड़क किनारे गरम ओदेंग शोरबे का एक घूँट ज़रूर लेकर देखें!
बुनसिक दुकान में साथ में ऑर्डर करने लायक डिशें
| डिश | विवरण |
|---|---|
| किमबाप | चावल और कई तरह की सामग्री को समुद्री शैवाल में लपेटकर काटा गया खाना, जो बुनसिक दुकान का बुनियादी मेन्यू है। टूना किमबाप जैसी अलग-अलग सामग्री वाली कई किस्में होती हैं, और तीखे खाने के साथ भी यह अच्छा लगता है। कोरिया कंज़्यूमर एजेंसी (한국소비자원) के मूल्य पोर्टल 'चामगागयॉक' के अनुसार, सितंबर 2026 में सियोल में इसकी औसत कीमत 3,923 वॉन प्रति रोल थी। |
| राबोक्की और तोक-रामयॉन | राबोक्की तोक्बोक्की में रामयॉन नूडल्स डालकर बनती है, और तोक-रामयॉन रामयॉन में चावल केक डालकर। जब सिर्फ़ तोक्बोक्की से पेट न भरे, तब भरपेट खाने के लिए अच्छे हैं। |
| मांदू | कोरियाई डम्पलिंग, जो अक्सर त्विगिम वाले मेन्यू में भी शामिल होते हैं, और इन्हें सोया सॉस या तोक्बोक्की की सॉस में डुबोकर भी खाया जाता है। कुछ जगहों पर भाप में पके और तले हुए, दोनों तरह के मांदू मिलते हैं। |
| जोलम्यॉन, उडोन जैसे नूडल्स | कुछ दुकानों में जोलम्यॉन या उडोन जैसे नूडल वाले मेन्यू भी होते हैं। मेन्यू कार्ड में दिखें, तो एक बार ज़रूर आज़माकर देखें। |
मेन्यू और कीमतें दुकान और इलाक़े के हिसाब से अलग होती हैं।